मेरी आँखों में क्यों नमी सी है ,
शायद ज़िन्दगी में कुछ कमी सी है ..
भीढ़ में भी है तन्हाई सी ,
हंसी है हमसे शरमाई सी ..
आसमान छूकर भी लगे,ज़मीन सी है ,
शायद ज़िन्दगी में कुछ कमी सी है ..
इतनी खुशियाँ हैं ज़िन्दगी में ,
बस एक आंसूं चुरा लेता है उन्हें ..
चहचहाने पर भी आवाज़ कहीं दबी सी है ,
शायद ज़िन्दगी में कुछ कमी सी है …
(1/FEB/2006)
शायद ज़िन्दगी में कुछ कमी सी है ..
भीढ़ में भी है तन्हाई सी ,
हंसी है हमसे शरमाई सी ..
आसमान छूकर भी लगे,ज़मीन सी है ,
शायद ज़िन्दगी में कुछ कमी सी है ..
इतनी खुशियाँ हैं ज़िन्दगी में ,
बस एक आंसूं चुरा लेता है उन्हें ..
चहचहाने पर भी आवाज़ कहीं दबी सी है ,
शायद ज़िन्दगी में कुछ कमी सी है …
(1/FEB/2006)
awasome.... :)
ReplyDeleteThank You Bhaiya :)
ReplyDelete