Monday, 25 July 2011

इंतज़ार

कहीं किसी की तन्हाईयों ने,
दूर से मुझे पुकारा है
आ जाओ मेरे पास तुम,
हमें भी इंतज़ार तुम्हारा है ..

हमने तो कईं रातों में,
तुम्हे चाँद में निहारा है
पर तुम हो की चेहरा दिखाते नहीं,
कब मुझसे मिलोगे ऐसा बताते नहीं
रात में आते हो ख्वाब बनकर,
रातें तो चुरा ली पर ये दिन हमारा है….
आ जाओ मेरे पास तुम
हमें भी इंतज़ार तुम्हारा है …..

नजाने कब,किस मोड़ पर मिलोगे तुम
,
सोचते हैं तुम्हे
ढूँढते ढूँढते
खुद ना हो जाएँ गुम,
वक़्त तो हम कितना भी गुज़ार लें ‘तुम बिन ’
पर दोष तो उम्र का सारा है …
आ जाओ मेरे पास तुम 
हमें भी इंतज़ार तुम्हारा है….

(24/jan/2005)

5 comments:

  1. कल 28/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  3. बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति....

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